इसमें कोई दो राय नहीं कि 'सर्जिकल स्ट्राइक' करना और फिर उसे इस तरह
आधिकारिक रूप से प्रचारित करना एक बहुत बड़ा जोखिमभरा जुआ है, जो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेला है. छोटी-बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' तो
पहले भी हुई है, 'बदले' पहले भी लिये गये हैं, लेकिन हर बार बिलकुल गुपचुप
और परदे में ढक-तोप कर. ऐसे
सारे मामले बस सेनाओं और सरकारों के बीच रह गये और दफ़न हो गये. कूटनीति ऊपर-ऊपर बदस्तूर चलती रही. इस बार बदलाव यही है कि एक तो बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गयी, एक साथ कई जगहों पर की गयी, और फिर बाक़ायदा पाकिस्तान को और पूरी दुनिया को बताया गया कि जो हमने करना था, कर दिया, अब जो जिसे करना हो, कर ले!
पाकिस्तान की मुश्किल यही है कि भारत पर जवाबी कार्रवाई के लिए उसके पास फ़िलहाल कोई 'ट्रिगर' नहीं है. उसके बिना वह अगर कोई जवाबी कार्रवाई करता है, तो दुनिया की नज़रों में वह युद्ध को उकसाने या शुरू करनेवाली कार्रवाई मानी जायेगी. इसलिए कम से कम यह तय है कि इस बार वह इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बदले में तुरन्त तो कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं है. लेकिन क्या पाकिस्तान चुप बैठ जायेगा?
क़मर वहीद नक़वी के साप्ताहिक कालम 'राग देश' में इस विषय पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.
सारे मामले बस सेनाओं और सरकारों के बीच रह गये और दफ़न हो गये. कूटनीति ऊपर-ऊपर बदस्तूर चलती रही. इस बार बदलाव यही है कि एक तो बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गयी, एक साथ कई जगहों पर की गयी, और फिर बाक़ायदा पाकिस्तान को और पूरी दुनिया को बताया गया कि जो हमने करना था, कर दिया, अब जो जिसे करना हो, कर ले!
पाकिस्तान की मुश्किल यही है कि भारत पर जवाबी कार्रवाई के लिए उसके पास फ़िलहाल कोई 'ट्रिगर' नहीं है. उसके बिना वह अगर कोई जवाबी कार्रवाई करता है, तो दुनिया की नज़रों में वह युद्ध को उकसाने या शुरू करनेवाली कार्रवाई मानी जायेगी. इसलिए कम से कम यह तय है कि इस बार वह इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बदले में तुरन्त तो कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं है. लेकिन क्या पाकिस्तान चुप बैठ जायेगा?
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