Friday, 20 March 2015

शुक्रिया सीसा, दुनिया को आइना दिखाने के लिए!


सीसा अबू दोह (Sisa Abu Daooh)’पुरुष’ बन गयी! और 43 साल तक मिस्र में वह पुरुषों के बीच निरापद हो कर मेहनत-मज़दूरी करती रही, कोई मर्यादा नहीं टूटी. उस पर समाज, संस्कृति, धर्म और चाल-चलन की नैतिकताएँ और सीमाएँ छलाँगने का कोई लाँछन नहीं लगा. क्यों? सिर्फ़ इसलिए कि लोगों की निगाह में वह एक पुरुष थी और कुछ भी असामान्य नहीं कर रही थी! लेकिन अगर वह वेश न बदलती तो एक महिला हो कर पुरुषों के बीच उसका काम कर पाना क़तई आसान नहीं होता! आगे...http://raagdesh.com/why-sisa-an-egypt-woman-lived-as-a-man-for-43-years/ 

Tuesday, 17 March 2015

Malda Clerics Stopped Women Football in West Bengal

मौलवियों और कुछ दकियानूसी मुसलमानों ने माल्दा में महिलाओं का फ़ुटबाल मैच नहीं होने दिया. आपत्ति थी कि महिलाएँ छोटे कपड़े पहन कर खेलेंगी, इससे इलाक़े की लड़कियों पर बुरा असर पड़ेगा और ऐसा खेल शरीअत के ख़िलाफ़ है! शर्म की बात है कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और उनके प्रशासन ने चन्द मुट्ठी भर कूढ़मग़ज़ दिमाग़ों के सामने घुटने टेक दिये. वोटपरस्ती की ऐसी ही घटिया सोच ने सेकुलरिज़्म को बजबजा दिया है.  आगे... http://raagdesh.com/malda-clerics-stopped-women-football-in-west-bengal/ 

Wednesday, 4 March 2015

काँग्रेस को चाहिए एक टच स्क्रीन!

राहुल गाँधी छुट्टी से या कि ‘चिन्तन’ से लौटेंगे, तो काँग्रेस के सामने नया रास्ता होगा या कि कोई बीच का रास्ता होगा या कि कुछ नहीं बदलेगा या कि राहुल अपनी राह पकड़ेंगे और पार्टी अपनी राह पकड़ेगी? एक, दो, तीन, चार; किस जवाब पर ‘टिक’ लगेगी? सबको इन्तज़ार है. पार्टी के भीतर भी और पार्टी के बाहर भी!  विवरण में पढ़ा>>