शुक्रिया सीसा, दुनिया को आइना दिखाने के लिए!
सीसा अबू दोह (Sisa Abu Daooh)’पुरुष’ बन गयी! और 43 साल तक मिस्र में वह पुरुषों के बीच निरापद हो कर मेहनत-मज़दूरी करती रही, कोई मर्यादा नहीं टूटी. उस पर समाज, संस्कृति, धर्म और चाल-चलन की नैतिकताएँ और सीमाएँ छलाँगने का कोई लाँछन नहीं लगा. क्यों? सिर्फ़ इसलिए कि लोगों की निगाह में वह एक पुरुष थी और कुछ भी असामान्य नहीं कर रही थी! लेकिन अगर वह वेश न बदलती तो एक महिला हो कर पुरुषों के बीच उसका काम कर पाना क़तई आसान नहीं होता! आगे...http://raagdesh.com/why-sisa-an-egypt-woman-lived-as-a-man-for-43-years/
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